संदेश

जुलाई, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कहानी दो बच्चो की

ये कहानी है दो बच्चो की जो एक गाँव मे रहते थे ऊनमे से एक 6 साल का था ओर एक दस साल का दोनो बहुत अच्छे दोस्त थे बिल्कुल सोले के जय और विरू कै जैसे दोनो हमेशा साथ-साथ मे रहते थे साथ-साथ खेलते साथ-साथ खाते पिता साथ-साथ नहाते धोते नही धोते नही ये थोड़ा ज़्यादा हो गया तो एक दिन वो दोनो गांव से थोड़ा दूर निकल गए खेलते खेलते उनमे से जो बड़ा बच्चा था वो दस साल वाला वो एक कुए मे गिर गया और जोर जोर से चीखने चिल्लाने लगया क्युकी उसे तैरना नही आता था अब जो दूसरा बच्चा था छोटा सा छे साल का उसने अपने आस-पास मे देखा और उसको कोई नजर नही आया उसको कोई नही दिखा जिसको के वो बुला सके हैल्प के लिए पास मे उसकी एक नजर पड़ी एक बाल्टी पे जिस पे एक रस्सी बंदी हुई थी उसने एक सेकेंड भी वेस्ट नही क्या उस बाल्टी को उठाकर कुए मे फेक दिया और अपने दोस्त को बोला के पकड़ ले ईसको उसके दोस्त ने पकड़ा और वो अपनी पूरी ताकत लगाकर के पागलो की तरह उसको खिचता रहा खिचता रहा खिचता रहा खिचता रहा खिचता रहा खिचता रहा अपनी पूरी जान लगा दी उस ने छोटे से बच्चे ने छे साल के और दस साल के बच्चे ने उस बाल्टी को पकड़ा हुआ था खिचता रहा खिचता र...

दोस्तो ये कहानी है एक टीचर और कुछ स्टुडेंट की है जोकी बहुत ही अच्छी कहानी है तो चलिये दोस्तो इस कहानी को शुरु करते है

दोस्तो ये कहानी है एक टीचर और कुछ स्टुडेंट की है जोकी बहुत ही अच्छी कहानी है तो चलिये दोस्तो इस कहानी को शुरु करते है  स्कूल के एक क्लास मे सर एंटर होते है और एंटर होते ही वो ब्लेक बोर्ड पे चोक से एक आड़ी लकीर बना देते है तो सब स्टुडेंट पूछते है के सर इसका क्या मतलब है तो सर बड़े ही प्यार से कहते है की इस लकीर को बिना मिटाए ही छोटी करके दिखाओ तो सबके सब स्टुडेंट सोच मे पढ़ जाते है के इस लकीर को बिना मिटाए ही छोटी कैसे कर सकते है तो उनि स्टुडेंट मे से एक स्टुडेंट उठकर आता है और सर के हाथ मे से चोक लेता है और उसी चोक से वो उस लकीर के ऊपर एक बढ़ी लकीर बना देता है तो इससे क्या होता है के जो लकीर सर ने बनाई थी वो बिना मिटाए ही अपने आप छोटी हो जाती है तो सर मुस्कराकर उस लड़के की तरफ देखते है और उसे शाबाशी देते हुए कहते हे वेरी गुड तो इतने मे सारे स्टुडेंट पूछते है के सर इसका क्या मतलब है तो सर कहते है के अगर आपको अपनी लाइफ मे कुछ बड़ा करना है कुछ अच्छा करना है सफल होना है या आगे बढ़ना है तो कभी भी किसीको गिराओ मत कभी भी किसीको छोटा मत करो बल्की तुम ख़ुद इतने बड़े बन जाओ के वो अपने आप ही ...

कहानी किसान और खरगोश बंदर की कहानी

एक किसान खरगोश और बंदर की कहानी  एक बार की बात है एक गाँव मे एक किसान रेहता था उस किसान को जानकर पालने का बहुत शौक था उसके पास पहले से ही बहुत सारी भैंस थी जिनका दूध बेचकर वो अपना घर चलाया करता था तो एक दिन उस किसान ने एक खरगोश और एक बंदर को भी अपने घर मे पाल लिया अब काफि दिन गुजरने के बाद उस किसान ने उस खरगोश और बंदर के साथ खेलने के बारे मे सोचा उस किसान ने अपने खेत मे कई सारे छोटे छोटे गड्ढे कर दिये और फिर उन गड्डो पर मिट्टी डालकर उन गड्डो को बंद कर दिया और किसी एक गड्ढे मे उस किसान ने एक गाजर को छुपा दिया अब उस किसान ने खरगोश और बंदर को उस गाजर को ढूंढने को कहा खरगोश बहुत ही कॉन्फिडेंस था ओर उसे अपने आप पर पूरा भरोसा और विश्वास था उसने एक एक गड्डे को खोदना शुरु किया और गाजर ढूंढने लगा लेकिन बंदर जो था वो बहुत ही नेगेटिव और आलसी था  उसने सोचा की एक खेत मे इतने सारे गड्ढे है और वो गाजर किसी एक गड्डे मे है इतना कोन ढूंढेगा वो बंदर ये सोचकर एक गड्ढे के ऊपर जाकर सो गया अब उधर खरगोश अपनी पूरी मेहनत से गाजर ढूंढ रहा था एक एक करके खरगोश ने सारे गड्ढे देख लिए लेकिन उसे किसी भी गड्ढे...

कहानी पांच मेंढक की

एक समय की बात है पाच मेढक एक साथ किसी जंगल से जा रहे थे चलते चलते उन मेढको मे से तीन मेढक एक बङे से गड्ढे मे गिर जाते है पाच मे से तीन मेढक एक गड्ढे मे गिर गए तो ऊपर दो मेढक बचे अब गड्ढे मे गिर ने के बाद वो तीनो मेढक ऊपर चङने कि बहुत कोशिश करते है लेकिन वो गड्ढा बहुत बङा था उस गड्ढे से बाहर निकल ना इतना आसान नही था अब गड्ढे के उपर जो दो मेढक बचे हुए थे वो गड्ढे के अन्दर देखकर तीनो मेढको से केहते है के अब तुम तीनो इस गड्ढे से कभी बहार निकल सकते हो ये बहुत बङा गड्ढा है तो तुमारा कोशीश करना व्यर्थ है ये सुनने के बाद उन तीनो मेढको मे से एक मेढक को लगता है कि ये सही बोल रहे है ये गड्ढा बहुत बङा है और अब हम इसमे से कभी नही निकल सकते तो वो मेढक थोङी कोशिश करने के बाद हार मान लेता है और उसी गड्ढे मे एक जगह आराम से जाकर बैठ जाता है अब बाकी जो दो मेढक थे वो अभी भी ऊपर चङने की कोशिश कर रहे थे अब उन दोनो को देखकर ऊपर वाले मेढक फिर से उन्हे कहते है की तुम जो कोशिश कर रहै हो वो बेकार तुम इस गड्ढे से कभी बहार नही निकल सकते हो और अब तुम्हे अपनी सारी ज़िन्दगी इस गड्ढे मे गुजारनी पड़ेगी अब ये सुनने के ब...